कटनी वनमण्डल में वन्यप्राणी अपराध पहचान एवं अन्वेषण पर एक दिवसीय कार्यशाला हुई आयोजित
कटनी। वन्यप्राणी अपराधों की रोकथाम, वैज्ञानिक जांच और प्रभावी अभियोजन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से कटनी वनमण्डल द्वारा “वन्यजीव अपराध पहचान एवं अन्वेषण” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन कटनी के गर्वित गंगवार के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यशाला में कटनी वनमण्डल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ-साथ कटनी पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) कटनी तथा मण्डला और जबलपुर वनमण्डलों के अधिकारियों-कर्मचारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर वन्यजीव अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की क्षमता को बढ़ाना था।
कार्यक्रम के प्रथम तकनीकी सत्र में वैज्ञानिक ‘एफ’ डॉ. एस. के. गुप्ता ने “वन्यजीव अपराध पहचान एवं फोरेंसिक” विषय पर व्याख्यान देते हुए वन्यजीव अपराधों से जुड़े साक्ष्यों की पहचान, संकलन और वैज्ञानिक परीक्षण की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने वन्यजीव अंगों, खाल, हड्डियों तथा अन्य जैविक साक्ष्यों के फोरेंसिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। द्वितीय सत्र में राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स, जबलपुर इकाई के प्रभारी डॉ. राजा खरे ने “वन्यजीव अपराध अन्वेषण : केस स्टडी” विषय पर व्याख्यान देते हुए सफल जांच की रणनीतियों, खुफिया सूचनाओं के उपयोग तथा अंतर-विभागीय समन्वय के महत्व को रेखांकित किया। तृतीय सत्र में अधिवक्ता मंजुला श्रीवास्तव ने “साक्ष्य संकलन एवं न्यायालय में प्रस्तुतिकरण” विषय पर जानकारी देते हुए वन्यजीव अपराध मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं, दस्तावेजीकरण और प्रभावी अभियोजन के उपायों पर विस्तृत चर्चा की।
कार्यशाला का विशेष आकर्षण फील्ड आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण रहा। प्रतिभागियों के लिए काल्पनिक (मॉक) अपराध स्थल तैयार किए गए, जहां उन्हें अपराध स्थल निरीक्षण, साक्ष्य चिन्हांकन, साक्ष्य संकलन, संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस अभ्यास से प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में जांच संबंधी कौशल विकसित करने का अवसर मिला। इस अवसर पर डीएफओ गर्वित गंगवार ने कहा कि वन्यजीव अपराधों की रोकथाम और प्रभावी जांच के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, विधिक समझ तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम क्षेत्रीय स्तर पर क्षमता निर्माण और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यशाला में एसडीओ पूर्व कटनी कार्तिकेय भट्ट, एसडीओ पश्चिम कटनी सुरेश बरोले सहित सभी रेंज अधिकारी एवं वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।








