कटनी में पुलिस प्रताड़ना का आरोप, मानवाधिकार आयोग से हुई शिकायत, आरक्षक से मारपीट के मामले ने पकड़ा तूल, पुलिस पर परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

कटनी में पुलिस प्रताड़ना का आरोप, मानवाधिकार आयोग से हुई शिकायत, आरक्षक से मारपीट के मामले ने पकड़ा तूल, पुलिस पर परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

कटनी। शहर के बावली टोला निवासी सुरेश कुमार बर्मन ने अपने पुत्र पारस बर्मन उर्फ गप्पू को कथित रूप से आरक्षक के साथ मारपीट के झूठे मामले में फंसाने और पुलिस अभिरक्षा में बुरी तरह मारपीट कर पैर तोड़ने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने इस मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक एवं माननीय न्यायालय से करते हुए निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिस कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। आरक्षक से मारपीट करने के मामले में पकड़े गए तीनों आरोपियों की जमानत आज शहर के विद्वान अधिवक्ता सुनील निगम, मीत धवल एवं दिव्य मिश्रा ने करवाई।
यह हुई शिकायत
इस मामले को लेकर की गई शिकायत में सुरेश बर्मन ने बताया कि उनका पुत्र पारस 22 जून 2026 की रात अपने मित्रों के साथ घर के पास स्कूटी पर बैठा हुआ था। इसी दौरान डायल-112 वाहन में पहुंचे थाना कोतवाली के आरक्षक रुपेश कुमार यादव ने कथित रूप से नशे की हालत में गाली-गलौज करते हुए पारस और उसके साथियों से मारपीट की। विरोध करने पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर उनके पुत्र और उसके साथियों के साथ कथित रूप से मारपीट की गई।
फुटेज की जांच कराने रखी मांग
आवेदक का आरोप है कि बाद में पुलिस द्वारा पारस और उसके साथियों के विरुद्ध कोतवाली थाना में अपराध क्रमांक 679/2026 दर्ज किया गया, जिसे उन्होंने झूठा और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने डायल-112 वाहन एवं थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराए जाने की मांग की है।
परिवार को भी किया परेशान
सुरेश बर्मन ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने उन्हें और उनकी पत्नी को भी थाने बुलाकर प्रताड़ित किया। उनका कहना है कि 23 जून को उनके पुत्र को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस अभिरक्षा में उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया, मारपीट की गई और उसका पैर तोड़ दिया गया। साथ ही, कथित रूप से उसे निर्वस्त्र कर वीडियो बनाने और शिकायत करने पर वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी गई।
आयोग से न्याय की उम्मीद
आवेदक ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एवं मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग को शिकायती पत्र भेजते हुए उक्त मामले की निष्पक्ष जांच कराने, झूठी एफआईआर समाप्त कराने तथा दोषी पुलिसकर्मी के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

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Author: RashtraRakshak

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