टीबी मुक्त कटनी की मुहिम बनी जनआंदोलन, कलेक्टर की पहल पर अधिकारी बने ‘निक्षय मित्र’, मरीजों तक पहुंचेगी पोषण और अपनत्व की सौगात

टीबी मुक्त कटनी की मुहिम बनी जनआंदोलन, कलेक्टर की पहल पर अधिकारी बने ‘निक्षय मित्र’, मरीजों तक पहुंचेगी पोषण और अपनत्व की सौगात

कटनी। किसी भी बीमारी से लड़ाई केवल दवाइयों से नहीं जीती जाती, बल्कि उसके लिए पोषण, देखभाल और समाज के सहयोग की भी आवश्यकता होती है। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत कटनी जिले में यही संवेदनशील सोच अब एक जनआंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है। कलेक्टर आशीष तिवारी की अभिनव पहल पर जिले के अधिकारी, कर्मचारी, उद्योगपति और विभिन्न विभाग आगे आकर ‘निक्षय मित्र’ बन रहे हैं और टीबी मरीजों के उपचार की राह को आसान बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं।
कटनी जिले को टीबी मुक्त बनाने के संकल्प के साथ कलेक्टर श्री आशीष तिवारी स्वयं भी 10 टीबी मरीजों के लिए पोषणयुक्त फूड बास्केट उपलब्ध कराने वाले निक्षय मित्र बने हैं। उनकी इस पहल ने प्रशासनिक अमले और समाज के विभिन्न वर्गों को भी प्रेरित किया है, जिसके परिणामस्वरूप अब टीबी मरीजों को केवल दवाइयां ही नहीं, बल्कि पोषण और आत्मीय सहयोग भी मिल रहा है।
प्रशासन ने बढ़ाया हाथ,समाज बना सहभागी
कलेक्टर की पहल से प्रेरित होकर जिले के कई विभाग और संस्थाएं इस अभियान से जुड़ रही हैं। नागरिक आपूर्ति निगम, कटनी ने सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय देते हुए टीबी मरीजों के लिए 45 हजार 600 रुपये की राशि एकत्रित की है। विभाग के 38 अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वयं आगे आकर आर्थिक सहयोग प्रदान किया है, जिससे मरीजों को पोषणयुक्त फूड बास्केट उपलब्ध कराई जाएगी। इतना ही नहीं, विभाग ने 36 टीबी मरीजों का निक्षय मित्र ऐप पर पंजीयन कराकर यह संदेश भी दिया है कि जनभागीदारी से किसी भी सामाजिक चुनौती का समाधान संभव है।
पंजीयन और पशुपालन विभाग भी बने सहारा
टीबी मरीजों के उपचार और पोषण में सहयोग के लिए पंजीयन विभाग ने 42 हजार रुपये की राशि जमा कराई है। वहीं उप संचालक पशुपालन डॉ. नीता मनोचा ने भी पांच टीबी मरीजों के पोषण आहार की जिम्मेदारी उठाते हुए अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाई है।
तहसीलों ने भी दिखाई सामाजिक जिम्मेदारी
कटनी नगर और कटनी ग्रामीण तहसील ने भी आगे बढ़कर 40 टीबी मरीजों के लिए 48 हजार रुपये की राशि रोगी कल्याण समिति में जमा कराई है। यह सहयोग केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का प्रतीक भी है।
कहां कितने मरीज, प्रशासन की नजर हर जरूरत पर
जिले में वर्तमान में कटनी-कन्हवारा में 136, विजयराघवगढ़ में 114, बहोरीबंद में 91, उमरियापान में 79, रीठी में 51 और बड़वारा में 40 टीबी मरीज चिन्हित किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन सभी मरीजों के उपचार के साथ-साथ पोषण सहायता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
पोषण और उपचार का मजबूत साथ
निक्षय मित्र’ योजना के तहत प्रत्येक मरीज को दो माह के लिए 1200 रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उन्हें उपचार के दौरान आवश्यक पोषण मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि पौष्टिक आहार और नियमित उपचार टीबी से शीघ्र स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कटनी से उठी संवेदनशीलता की मिसाल
कटनी में शुरू हुई यह पहल केवल प्रशासनिक अभियान भर नहीं रह गई है, बल्कि यह समाज और प्रशासन के बीच सहयोग, संवेदना और मानवता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनती जा रही है। जब अधिकारी स्वयं मरीजों के लिए आगे आकर सहयोग करते हैं, तो यह संदेश पूरे समाज तक पहुंचता है कि बीमारी से लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की जिम्मेदारी है। टीबी मुक्त कटनी का यह संकल्प अब केवल सरकारी लक्ष्य नहीं, बल्कि जनभागीदारी और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा एक सामूहिक अभियान बन चुका है।

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Author: RashtraRakshak

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