घर से निकला स्कूल के लिए बस में बैठकर पहुंच गया बाकल, पुलिस ने दिखाई तत्परता, इधर उधर भटक रहे 10 वर्षीय बालक को सुरक्षित पहुंचाया घर, परिजनों ने पुलिस का जताया आभार

कटनी। घर से स्कूल जाने के लिए निकला एक दस वर्षीय बालक अपने गांव से एक बस में बैठकर बाकल पहुंच गया और बाकल पहुंचने के बाद वह इधर-उधर भटकने लगा। 10 वर्षीय मासूम बालक को इधर-उधर भटकता देख वहां मौजूद पुलिस ने तुरंत ही स्थिति को भांप लिया और बालक को तुरंत अपनी अभिरक्षा में लेते हुए किसी तरह घंटों की मशक्कत के बाद उसके परिजनों को आखिरकार खोज निकाला और बालक को सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द किया। बच्चे को सकुशल पाकर परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस के प्रयासों की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।
बाकल थाना प्रभारी अनिल यादव ने जानकारी देते हुए कहा कि बाकल थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मनगवां निवासी गुड्डा गोंड का 10 वर्षीय पुत्र राजेश गत शनिवार की सुबह घर से स्कूल जाने के लिए निकला था। गांव से एक बस में बैठकर वह बाकल पहुंच गया। बाकल में वह इधर-उधर भटक रहा था, इसी बीच पुलिस की बच्चे पर नजर पड़ गई। बच्चा ठीक तरह से अपना पता नहीं बता रहा था। कई घंटे की मशक्कत के बाद उसके गांव और परिवार का पता चला तब कहीं जाकर उसे सुरक्षित घर पहुंचा जा सका।
घर से निकला स्कूल के लिए बस में बैठकर पहुंच गया बाकल, पुलिस ने दिखाई तत्परता, इधर उधर भटक रहे 10 वर्षीय बालक को सुरक्षित पहुंचाया घर, परिजनों ने पुलिस का जताया आभार,
कटनी। घर से स्कूल जाने के लिए निकला एक दस वर्षीय बालक अपने गांव से एक बस में बैठकर बाकल पहुंच गया और बाकल पहुंचने के बाद वह इधर-उधर भटकने लगा। 10 वर्षीय मासूम बालक को इधर-उधर भटकता देख वहां मौजूद पुलिस ने तुरंत ही स्थिति को भांप लिया और बालक को तुरंत अपनी अभिरक्षा में लेते हुए किसी तरह घंटों की मशक्कत के बाद उसके परिजनों को आखिरकार खोज निकाला और बालक को सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द किया। बच्चे को सकुशल पाकर परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस के प्रयासों की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।
बाकल थाना प्रभारी अनिल यादव ने जानकारी देते हुए कहा कि बाकल थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मनगवां निवासी गुड्डा गोंड का 10 वर्षीय पुत्र राजेश गत शनिवार की सुबह घर से स्कूल जाने के लिए निकला था। गांव से एक बस में बैठकर वह बाकल पहुंच गया। बाकल में वह इधर-उधर भटक रहा था, इसी बीच पुलिस की बच्चे पर नजर पड़ गई। बच्चा ठीक तरह से अपना पता नहीं बता रहा था। कई घंटे की मशक्कत के बाद उसके गांव और परिवार का पता चला तब कहीं जाकर उसे सुरक्षित घर पहुंचा जा सका।








