स्वास्थ सेवाएं बदहाल, डॉक्टर उठा रहे दवाइयों के डिब्बे, बड़गांव अस्पताल में स्टाफ की कमी या सिस्टम की लापरवाही?

स्वास्थ सेवाएं बदहाल, डॉक्टर उठा रहे दवाइयों के डिब्बे, बड़गांव अस्पताल में स्टाफ की कमी या सिस्टम की लापरवाही?

कटनी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़गांव का एक दृश्य हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देता है। जिस डॉक्टर के कंधों पर मरीजों का इलाज और उनकी जान बचाने की जिम्मेदारी होती है, वही डॉक्टर अस्पताल की व्यवस्थाएं संभालते हुए दवाइयों के डिब्बे उठाकर व्यवस्थित करते नजर आए। यह तस्वीर केवल एक डॉक्टर की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करती है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुजस मोदी ओपीडी के दौरान मिले खाली समय में अस्पताल में बिखरी दवाइयों और मेडिकल सामग्री को स्वयं व्यवस्थित करते दिखाई दिए। वे एक-एक डिब्बा उठाकर सही स्थान पर रख रहे थे, ताकि अस्पताल सुव्यवस्थित रहे और मरीजों को बेहतर सुविधा मिल सके। डॉक्टरों को समाज में भगवान का दर्जा दिया जाता है, क्योंकि उनका पहला दायित्व मरीजों का उपचार करना है। लेकिन जब वही डॉक्टर अन्य कर्मचारियों के हिस्से का काम भी करने को मजबूर हो जाएं, तो यह सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है कि आखिर स्वास्थ्य व्यवस्था किस दिशा में जा रही है।
जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़गांव में लगभग 9 कर्मचारियों के पद स्वीकृत एवं पदस्थ बताए जाते हैं, लेकिन वर्तमान में केवल चार कर्मचारी ही अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं। शेष कर्मचारियों को कथित रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रीठी में अटैच कर रखा गया है। यही कारण है कि अस्पताल में नियमित कार्य प्रभावित हो रहे हैं और मौजूद कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि कर्मचारियों की मूल पदस्थापना बड़गांव में है, तो उन्हें लंबे समय से रीठी में अटैच क्यों रखा गया है? यदि वास्तव में बड़गांव में स्टाफ की कमी है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या इतनी बड़ी जनसंख्या वाले क्षेत्र के अस्पताल को केवल चार कर्मचारियों के भरोसे चलाना उचित है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अटैच कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना पर वापस भेज दिया जाए, तो अस्पताल की व्यवस्थाओं में काफी सुधार आ सकता है और डॉक्टरों को प्रशासनिक व अन्य कार्यों के बजाय मरीजों के उपचार पर पूरा ध्यान देने का अवसर मिलेगा। अब जरूरत इस बात की है कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले का गंभीरता से संज्ञान ले, बड़गांव अस्पताल में पदस्थ कर्मचारियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे और यदि कर्मचारी अन्यत्र अटैच हैं तो उनकी समीक्षा कर आवश्यक निर्णय ले। क्योंकि अस्पताल में डॉक्टर का समय मरीजों के इलाज के लिए होना चाहिए, न कि दवाइयों के डिब्बे उठाकर व्यवस्था बनाने के लिए।

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Author: RashtraRakshak

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