कटनी के रीठी में 4 घंटे तक पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर नदारद, शव के साथ भटकते रहे परिजन, लापरवाही पर उठे सवाल
कटनी। जिले के रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आई एक घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत को उजागर कर दिया है। यहां लापरवाही इस कदर हावी है कि मौत के बाद भी इंसान को सम्मान नहीं मिल पा रहा। ताजा मामला आज का है, जब एक 70 वर्षीय बुजुर्ग की सुबह करीब 10 बजे सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद परिजन भारी मन से शव को पोस्टमार्टम के लिए रीठी के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यहां उन्हें संवेदनहीन व्यवस्था का सामना करना पड़ेगा।
बताया जा रहा है कि अस्पताल पहुंचने के बाद परिजन घंटों तक डॉक्टर का इंतजार करते रहे। समय बीतता गया, लेकिन डॉक्टर साहब का कहीं अता-पता नहीं था। दोपहर 2 बजे तक, यानी पूरे 4 घंटे बीत जाने के बाद भी पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। परिजनों की हालत बेहद दयनीय थी। एक तरफ अपने प्रियजन को खोने का गम, और दूसरी तरफ सिस्टम की बेरुखी, दोनों का दर्द साफ दिखाई दे रहा था। वे कभी अस्पताल स्टाफ से गुहार लगाते, तो कभी इधर-उधर डॉक्टर को ढूंढते नजर आए। इस दौरान पुलिस भी कम परेशान नहीं दिखी। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए पुलिसकर्मी भी अस्पताल परिसर में भटकते रहे, लेकिन जिम्मेदार डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इस तरह की लापरवाही इन दिनों आम हो गई है। यहां पदस्थ डॉक्टर पोस्टमार्टम जैसे जरूरी कार्यों से बचते नजर आते हैं और बहाने बनाकर जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब डॉक्टर, जिन्हें धरती पर भगवान का दर्जा दिया जाता है, अगर वही अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लें, तो आम जनता किस पर भरोसा करे?, क्या एक मृत व्यक्ति को सम्मानजनक अंतिम प्रक्रिया देना भी अब इस सिस्टम के लिए बोझ बन गया है?, क्या प्रशासन इस लापरवाही पर कोई सख्त कदम उठाएगा? या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?, यह घटना न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि इंसानियत को भी कटघरे में खड़ा करती है। अब जरूरत है सख्त कार्रवाई की, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह की पीड़ा और अपमान का सामना न करना पड़े।








