सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने पर हंगामा, आदिवासियों को एक हफ्ते का समय, ढीमरखेड़ा के भरतपुर गांव की घटना
कटनी। कटनी जिले के ढीमरखेड़ा तहसील में एक बड़ा विवाद तब खड़ा हो गया, जब वन विभाग की टीम 100 एकड़ सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंची। यह जमीन भरतपुर गांव के आदिवासियों द्वारा खेती के लिए तैयार की जा रही थी। वन विभाग की कार्रवाई का विरोध करते हुए, सैकड़ों आदिवासी महिला और पुरुष जेसीबी मशीनों पर चढ़ गए और टीम को काम करने से रोक दिया। घटना ढीमरखेड़ा तहसील मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर हुई। वन विभाग के एसडीओ जया पांडे और रेंजर अजय मिश्रा अपनी टीम के साथ दो जेसीबी मशीनें लेकर मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि उन्हें इस सरकारी जमीन पर अवैध रूप से खेती की तैयारी की शिकायत मिली थी। जैसे ही टीम ने काम शुरू किया, गुस्साए ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालात तनावपूर्ण होने पर, ढीमरखेड़ा थाना प्रभारी अभिषेक चौबे, तहसीलदार आकांक्षा चौरसिया और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया और उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से एक सप्ताह के भीतर जमीन खाली करने के लिए कहा। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर कब्जा करना कानूनी अपराध है और ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। ग्रामीणों ने वन विभाग पर मनमाने तरीके से कार्रवाई करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने बताया कि यह जमीन उनके पूर्वजों के समय से उनके कब्जे में है और वे इस पर खेती की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने पहले भी अधिकारियों से इस मामले की शिकायत की थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने जबरन कार्रवाई की तो वे जिला मुख्यालय में उग्र प्रदर्शन करेंगे।। इस मामले में एसडीओ जया पांडे ने बताया कि उन्हें 4-Z श्रेणी की इस सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत मिली थी, जिसके बाद वे इसे हटाने के लिए गए थे। उन्होंने कहा कि पुलिस और तहसीलदार के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल ग्रामीणों को एक सप्ताह का समय दिया गया है ताकि वे शांतिपूर्वक जमीन खाली कर दें।








