बचैया में अस्पताल या ‘मौत का गलियारा, टॉर्च की रोशनी में प्रसव और खिड़कियों पर सांपों का पहरा, गांव की जनता का फूटा गुस्सा
कटनी। स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता और प्रशासनिक लकवे का सबसे खौफनाक चेहरा बहोरीबंद ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बचैया में देखने को मिल रहा है। यहाँ प्रसव के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए यह अस्पताल नहीं, बल्कि एक ‘यातना गृह’ बन चुका है। क्षेत्र के लगभग 40 गांवों की जनता की जान यहाँ भगवान भरोसे है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी अपनी कुंभकर्णी नींद से जागने को तैयार नहीं हैं।
BMO की ‘लापरवाही’ ने बनाया अस्पताल को नर्क
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बचैया का वित्तीय प्रभार पिछले 2 वर्षों से खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) के पास है। आरोप है कि वर्ष 2024 से अब तक बीएमओ महोदय ने अस्पताल की सुध लेना तो दूर, यहाँ एक धेले का भी वित्तीय कार्य नहीं कराया। बार-बार की शिकायतों और सूचनाओं के बावजूद चुप्पी यह दर्शाती है कि उन्हें शासन-प्रशासन या आम जनमानस की जान की कोई परवाह नहीं है।
बूंद-बूंद पानी को तरसती प्रसूताएं, मोबाइल टॉर्च ही सहारा
हैरानी की बात यह है कि इस प्रसव केंद्र में पिछले एक साल से पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद है। कुंवर और अन्य गांवों से आने वाली महिलाओं के परिजन बाहर से बाल्टी में पानी ढोकर लाने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं, खराब पड़े इन्वर्टर ने अस्पताल को अंधेरी गुफा में तब्दील कर दिया है। रात के समय होने वाले प्रसव मोबाइल की फ्लैशलाइट और टॉर्च की रोशनी में कराए जा रहे हैं। ऐसे में यदि किसी जच्चा-बच्चा की जान चली जाए, तो क्या बीएमओ इसकी जिम्मेदारी लेंगे?
वार्ड में सांप-बिच्छू और जंगली जानवरों का खौफ
अस्पताल परिसर के चारों ओर उगे झाड़-झंखाड़ जहरीले जीवों की शरणस्थली बन चुके हैं। खिड़कियों के रास्ते अक्सर सांप, बिच्छू और कबरबिज्जू जैसे खतरनाक जानवर वार्ड के भीतर तक आ जाते हैं। केवल 2 स्टाफ के भरोसे चल रहे इस केंद्र में सुरक्षा के नाम पर ‘शून्य’ व्यवस्था है। यही कारण है कि कोई भी महिला प्रसव के बाद यहाँ 3 दिन रुकने का जोखिम नहीं उठाना चाहती।
जनता की मांग: लापरवाह अधिकारी को तत्काल हटाओ
अस्पताल की इस बदहाली से आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की इस संवेदनहीनता से तो बेहतर है कि ग्रामवासी अपने घरों में ही प्रसव कराएं। क्षेत्र की जनता ने मांग की है कि खंड चिकित्सा अधिकारी को तत्काल पद से पृथक कर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए और अस्पताल में बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं बहाल की जाएं।








