बदलेगी मत्स्य क्षेत्र की तस्वीर, आधुनिक तकनीक से मछुआरों की आय में होगी बढ़ोतरी, रोजगार और उत्पादन में वृद्धि के लिए जलाशयों में होगी केज कल्चर की स्थापना, जिला पंचायत सीईओ ने समीक्षा कर अधिकारियों को दिए निर्देश
कटनी। कलेक्टर के निर्देश पर जिला पंचायत के सभाकक्ष में सोमवार को जिला पंचायत की सीईओ श्रीमती हरसिमरनप्रीत कौर की अध्यक्षता में जिले में केज कल्चर पद्धति से मत्स्य उत्पादन में वृद्धि करने के उद्देश्य से जिला पंचायत स्वामित्व के जलाशयों में केज़ स्थापित करने हेतु बैठक आयोजित हुई। सहायक संचालक मत्स्य उद्योग आशीष कुमार नायक द्वारा जिला पंचायत स्वामित्व के जलाशयों एवं उनमें कार्यरत पंजीकृत सहकारी समितियों की जानकारी दी गई। साथ ही उन्होंने केज कल्चर पद्धति तथा उससे होने वाली आय में वृद्धि से मत्स्य कृषकों को अवगत कराया। उल्लेखनीय है कि जिला पंचायत के स्वामित्व के जलाशय ठरका, सगौना और बहोरीबंद जलाशय है।
जिला पंचायत सीईओ श्रीमती कौर ने समिति के सदस्यों को जलाशय में केज कल्चर पद्धति एवं मत्स्य उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक अपनाने से समितियां मत्स्य उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि कर भरपूर आय प्राप्त कर सकेंगे। उन्हें रोजगार मिलेगा। ऐसा होने से मत्स्य क्षेत्र के किसानों की तस्वीर बदलेगी। श्रीमती कौर ने मछुआ सहकारी समिति के अध्यक्ष से संवाद कर निर्देशित करते हुए कहा कि सभी समितियां अपने सदस्यों के मछुआ किसान क्रेडिट कार्ड बनवाएं और आर्थिक लाभ प्राप्त करें। समीक्षा करते हुए जिला पंचायत सीईओ श्रीमती कौर ने कहा कि मत्स्य पालन केवल आजीविका का साधन नहीं बल्कि सामाजिक- आर्थिक उत्थान का मजबूत आधार है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक अपनाने और नीली क्रांति से मत्स्य किसान समृद्ध होंगे।
इनकी रही मौजूदगी
समीक्षा बैठक में सहायक आयुक्त सहकारिता राजवर्धन कुरील, मत्स्य निरीक्षक देवेंद्र कुमार चक्रवर्ती, रुचि प्रजापति, प्रियंका पटेल एवं उल्लिखित मछुआ सहकारी समितियों के अध्यक्ष सुरजीत सिंह, जगत सिंह और संतोष बर्मन एवं अन्य मछुआ समितियों के सदस्य उपस्थित रहे।








