धार्मिक कार्य स्वर्ग और मोक्ष का बीज है:  मुनिश्री, भव्यता के साथ पंच कल्याणक महा महोत्सव का हुआ समापन

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कटनी, बहोरीवंद। आज का वर्तमान समाज विज्ञान की प्रगति के चमत्कार को देखकर चमत्कृत है। परिथ फल का आकाशी है, विज्ञान व्रत एक विद्युत बल्ब की प्रकाश यात्रा पर विचार करें तो प्रथम एक सच्चाई यह है कि वायर मी खंबा केवल लाइन सब स्टेशन फिर विद्युत की दूर तक की यात्रा पश्चातज हां से सप्लाई होती है। वहां पर भी अनेकों संयंत्र एक बल्ब के पीछे की प्रकाश व्यवस्था में अनेकों कारणो के पश्चात एक बल्ब प्रकाशित होता हैइसके बावजूद भीयदि सप्लाई बाधित होती है तो अंधेरा ही है यह विज्ञान है,

जबकि धार्मिक कार्य का प्रतिफल ऐसा नहीं है जैन आगम के अनुसार साधु का भेष द्रव्य एवं भाव दो तरह का है यदि साधु पूर्ण शुद्ध शुद्धात्म स्वभाव वाला है तो मोक्ष सुनिश्चित है मोक्ष सुनिश्चित है ऐसे हीआपके धार्मिक कार्य हैं आपका श्रद्धा विवेक समर्पण गुरु और परमात्मा की सेवाकरते हैं उससे आपको परंपरा से मोक्ष प्राप्त होगा उक्त आशय के सारगर्भित उद्गार मुनि श्री सुधासागर जी एवं मुनि श्री प्रसाद सागर जी ने बहोरीवंद मे होने वाले पंच कल्याणक  प्रतिष्ठा महोत्सव के समापन अवसर पर श्रीजी को उच्चासन पर विराजमान किया गया तत्वस्वात प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया  सानिद् में 1008 कलशो से पाशाण से परमात्मा बने भगवान शानिनाथ जी का त्रिलोक तीर्थ जिनालय मे महा मस्तिकाभिषेक तथा यागमंडल विधान के समापन पर विशिष्ट पात्रो एवं सामान्य द्वारा हवन की पूर्णाहुति की गई। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्रीमंत सेठ उत्तमचंद जैन कोयला, अनुराग जैन, प्रमोद जैन काका, महेन्द्र जैन, मनोज जैन, प्रशांत जैन, सत्येन्द्र जैन, डा के एल जैन, प्रशांत जैन, सुरेन्द्र सिंघई, विनय जैन, नरेन्द्र सिंघई, दिनेश जैन, प्रदीप जैन, पुष्पेन्द्र मोदी, युवामंडल महिला मंडल के सदस्यो की बडी संख्या मे उपस्थिति रही।

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Author: RashtraRakshak

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