नियमों की अवहेलना करने पर तीन उर्वरक विक्रेताओं का उर्वरक विक्रय प्राधिकार निरस्‍त, उर्वरक विक्रेताओं को एक माह के अंदर खाद स्‍कंधों का विक्रय करने के दिए गये निर्देश, एक माह के बाद बचे उर्वरकों को किया जाएगा राजसात

नियमों की अवहेलना करने पर तीन उर्वरक विक्रेताओं का उर्वरक विक्रय प्राधिकार निरस्‍त, उर्वरक विक्रेताओं को एक माह के अंदर खाद स्‍कंधों का विक्रय करने के दिए गये निर्देश, एक माह के बाद बचे उर्वरकों को किया जाएगा राजसात

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कटनी। अमानक बीज एवं उर्वरक विक्रेताओं के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही करने के कलेक्‍टर दिलीप कुमार यादव द्वारा दिए गये निर्देश के पालन में नियमों का उल्‍लंघन करने पर विकासखण्‍ड बड़वारा के तीन उर्वरक विक्रेताओं का उर्वरक विक्रय प्राधिकार निरस्‍त कर दिया गया है।
कलेक्‍टर श्री यादव के निर्देश पर की गई इस कार्यवाही के संबंध में उपसंचालक किसान कल्‍याण एवं कृषि विकास और उर्वरक पंजीयन अधिकारी मनीष मिश्रा ने बताया कि ग्राम खितौली के मेसर्स साक्षी ट्रेडर्स (प्रो. प्रमोद कुमार गुप्ता), बरही के मेसर्स मंजा बीज भंडार (प्रो. दुर्गाशरण कचेर) एवं मेसर्स खेतीबाड़ी बीज भण्‍डार (प्रो. जमुना प्रसाद साहू) के विरूद्ध उर्वरक गुणनियंत्रण आदेश 1985 की धारा 4 एवं 35 के उल्लंघन करने पर उर्वरक विक्रय प्राधिकार निस्‍त करने की कार्यवाही की गई है।
श्री मिश्रा ने बताया कि मेसर्स साक्षी ट्रेडर्स को उर्वरक विक्रय प्राधिकार 23 अक्‍टूबर 2014 को जारी किया गया था। जो 29 जनवरी 2026 तक वैध था। इसे तत्‍काल प्रभाव से समाप्‍त कर दिया गया है।
इसी प्रकार मेसर्स मंजा बीज भंडार को 14 सितंबर 2021 को उर्वरक विक्रय प्राधिकार प्रदान किया गया था एवं इसकी वैधता 13 सितंबर 2026 तक थी। इसे तत्‍काल प्रभाव से समाप्‍त कर दिया गया है। जबकि मेसर्स खेतीबाड़ी बीज भंडार को 13 अक्‍टूबर 2017 को विक्रय प्राधिकार प्रदान किया गया था। इसकी वैधता तिथि 30 सितंबर 2025 तक थी। जिसे तत्‍काल प्रभाव से समाप्‍त कर दिया गया है।
उल्‍लेखनीय है कि इन विक्रेताओं को कारण बताओं नोटिस जारी कर तीन दिवस में जबाव प्रस्तुत करने हेतु लेख किया गया था। परंतु, संबंधित संस्थानों द्वारा प्रस्तुत जबाव संतोषप्रद नहीं पाया गया है। जिसके बाद श्री मिश्रा ने उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश-1985 के खण्‍ड 31(1) के अंतर्गत यह कार्यवाही करते हुए इन संस्‍थानों को प्रदाय उर्वरक विक्रय प्राधिकार निरस्‍त कर दिया।
साथ ही संबंधित विक्रेता संस्थानों को निर्देशित किया गया है कि ये संस्थान अपने पास उपलब्ध समस्त उर्वरक स्कन्धों का विक्रय एक माह की अवधि के अन्दर कर लें, अन्यथा एक माह पश्चात् शेष बचे उर्वरकों को राजसात कर लिया जायेगा।

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Author: RashtraRakshak

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