आग लगने से पवन ज्वेलर्स की गृहस्थी हुई खाक, शॉर्ट सर्किट से लगी आग, लाखों का हुआ नुकसान, दमकल वाहन की कमी बनी बड़ी वजह
कटनी। जिले की स्लीमनाबाद तहसील में शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे बिजली आते ही शॉर्ट सर्किट के कारण पवन ज्वेलर्स में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि घर में रखा पूरा सामान कुछ ही मिनटों में जलकर खाक हो गया। आग लगते ही घर के सभी सदस्य किसी तरह बाहर निकलकर अपनी जान बचाने में सफल रहे। अचानक लगी आग से पूरे मोहल्ले में अफरा-तफरी मच गई। आग की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया।
ग्रामीणों की सूझबूझ से टली बड़ी अनहोनी
ग्रामीणों ने पानी, बाल्टी और अन्य साधनों से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक पूरी गृहस्थी जलकर राख हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि घर में रखी करीब एक लाख रुपये नगद भी आग की भेंट चढ़ गई। इसके अलावा सोने-चांदी के जेवरात, कपड़े, बर्तन, अनाज और दैनिक उपयोग का सारा सामान पूरी तरह नष्ट हो गया।
दमकल पहुंची देर से, तब तक सब खत्म
घटना की सूचना फायर ब्रिगेड को दी गई, लेकिन स्लीमनाबाद तहसील में एक भी दमकल वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण कटनी से दमकल वाहन बुलवाना पड़ा। कटनी से स्लीमनाबाद की दूरी करीब 30 किलोमीटर है, जिससे दमकल वाहन को मौके पर पहुंचने में लगभग एक घंटे का समय लग गया। जब तक दमकल वाहन मौके पर पहुंची, तब तक ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पाया जा चुका था। यदि समय पर दमकल वाहन उपलब्ध होता, तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था।
101 गांवों की तहसील, फिर भी दमकल शून्य
स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र में 101 से अधिक गांव आते हैं, इसके बावजूद तहसील मुख्यालय में आज तक एक भी दमकल वाहन उपलब्ध नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार प्रशासन से दमकल वाहन की मांग की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। क्षेत्र में पहले भी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां किसानों की फसल आग लगने से जलकर राख हो गई, लेकिन दमकल की अनुपलब्धता के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा।
प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
घटना की जानकारी तहसीलदार को दी गई, लेकिन तहसीलदार सारिका रावत ने पटवारी को भेजने का हवाला देकर खुद मौके पर आने से पल्ला झाड़ लिया। हैरानी की बात यह है कि अब तक न पटवारी, न आरआई और न ही तहसीलदार मौके पर पहुंचे हैं। यदि समय रहते मौके का निरीक्षण हो जाता, तो पीड़ित परिवार के जले हुए सामान को बाहर निकालकर कम से कम खाने-पीने और अस्थायी राहत की व्यवस्था की जा सकती थी।








