????बाबा रे बाबा????
सतगुरु बाबा ईश्वर शाह पर दायर अपराधिक परिवाद में सुलह, अनिल की मांगे मानने को तैयार हुए दरबारी, राष्ट्र रक्षक न्यूज़ की खबर का हुआ असर, तो क्या अनिल के आरोपों में थी कोई सच्चाई?, अगर आरोप थे झूठे तो क्यों सुलह के लिए तैयार हो गए दरबारी?…..
कटनी। माधव नगर के महान संत सतगुरु बाबा ईश्वर शाह के खिलाफ माननीय न्यायालय के समक्ष दायर किए गए अपराधिक परिवाद को लेकर लगातार प्रकाशित हो रही खबरों के कारण मामले को न्यायालय के बाहर आपसी बातचीत के जरिए समाप्त करने की कवायत लगभग संपन्न हो चुकी है। सूत्र बताते हैं कि सामाजिक बैठकों के बीच इस मामले को शांत कराने के लिए अनिल की सारी मांगे दरबार ने मान ली है। इस तरह अनिल की हर मांग पर दरबार ने मोहर लगाते हुए उसकी मांगे मानने की मंजूरी देकर इस पूरे प्रकरण ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिस तरह बातचीत के जरिए अनिल की मांगे मानकर मामले को शांत कराने की कवायत की गई उससे अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या अनिल ने महान संत सतगुरु बाबा ईश्वर शाह पर जो आरोप लगाते हुए माननीय न्यायालय के समक्ष एक आपराधिक परिवाद दायर किया, क्या उन आरोपों में कोई सच्चाई थी, जिसे दबाने के लिए इस तरह की कवायत को अंजाम दिया गया। खुद अनिल का मानना है कि यदि राष्ट्र रक्षक न्यूज़ चैनल उसके परिवाद की खबरों को इस तरह समाज के सामने उजागर नहीं करता तो शायद सच्चाई की जीत नहीं होती। अब अगर अनिल अपनी जीत को सच्चाई की जीत बता रहा है तो फिर क्या वे आरोप सही है जिनका जिक्र अनिल ने अपने परिवाद में किया है।
अन्य पीड़ितों में आएगा हौसला
जिस तरह अनिल ने न्याय पाने के लिए अपनी लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया अनिल की वह लड़ाई समाज के ऐसे सभी पीड़ितों के लिए मिसाल बनेगा जो कि इस तरह के किसी भी मामले में पीड़ित हो। अनिल की सफलता को देखकर अब शायद और भी पीड़ित अपने हक की लड़ाई बेबाकी से लड़ पाए।
इस पूरे मामले में राष्ट्र रक्षक न्यूज़ चैनल ने जिस तरह से खबरों का प्रकाशन किया वह किसी की भावनाओं को आहत करने का प्रयास नहीं था, बल्कि एक पीड़ित द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष दायर किए गए परिवाद में लगाए गए आरोपो को लेकर था। यदि मीडिया ही किसी पीड़ित की आवाज को उठाने का काम नहीं करेगी तो भला चतुर्थ स्तंभ के रूप में स्थान रखने वाली मीडिया की जरूरत ही क्या है। राष्ट्र रक्षक द्वारा अनिल के परिवाद को लेकर प्रकाशित की गई खबरों से यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो राष्ट्र रक्षक न्यूज़ चैनल उसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं। लेकिन किसी की भावनाओं को अहत करने का उद्देश्य राष्ट्र रक्षक न्यूज़ चैनल का बिल्कुल भी नहीं था। राष्ट्र रक्षक न्यूज़ चैनल हर उस पीड़ित के साथ हमेशा खड़ा रहने का प्रयत्न करता है जिसे न्याय की आस हो।
????बाबा रे बाबा????
सतगुरु बाबा ईश्वर शाह पर दायर अपराधिक परिवाद में सुलह, अनिल की मांगे मानने को तैयार हुए दरबारी, राष्ट्र रक्षक न्यूज़ की खबर का हुआ असर, तो क्या अनिल के आरोपों में थी कोई सच्चाई?, अगर आरोप थे झूठे तो क्यों सुलह के लिए तैयार हो गए दरबारी?…..
कटनी। माधव नगर के महान संत सतगुरु बाबा ईश्वर शाह के खिलाफ माननीय न्यायालय के समक्ष दायर किए गए अपराधिक परिवाद को लेकर लगातार प्रकाशित हो रही खबरों के कारण मामले को न्यायालय के बाहर आपसी बातचीत के जरिए समाप्त करने की कवायत लगभग संपन्न हो चुकी है। सूत्र बताते हैं कि सामाजिक बैठकों के बीच इस मामले को शांत कराने के लिए अनिल की सारी मांगे दरबार ने मान ली है। इस तरह अनिल की हर मांग पर दरबार ने मोहर लगाते हुए उसकी मांगे मानने की मंजूरी देकर इस पूरे प्रकरण ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिस तरह बातचीत के जरिए अनिल की मांगे मानकर मामले को शांत कराने की कवायत की गई उससे अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या अनिल ने महान संत सतगुरु बाबा ईश्वर शाह पर जो आरोप लगाते हुए माननीय न्यायालय के समक्ष एक आपराधिक परिवाद दायर किया, क्या उन आरोपों में कोई सच्चाई थी, जिसे दबाने के लिए इस तरह की कवायत को अंजाम दिया गया। खुद अनिल का मानना है कि यदि राष्ट्र रक्षक न्यूज़ चैनल उसके परिवाद की खबरों को इस तरह समाज के सामने उजागर नहीं करता तो शायद सच्चाई की जीत नहीं होती। अब अगर अनिल अपनी जीत को सच्चाई की जीत बता रहा है तो फिर क्या वे आरोप सही है जिनका जिक्र अनिल ने अपने परिवाद में किया है।
अन्य पीड़ितों में आएगा हौसला
जिस तरह अनिल ने न्याय पाने के लिए अपनी लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया अनिल की वह लड़ाई समाज के ऐसे सभी पीड़ितों के लिए मिसाल बनेगा जो कि इस तरह के किसी भी मामले में पीड़ित हो। अनिल की सफलता को देखकर अब शायद और भी पीड़ित अपने हक की लड़ाई बेबाकी से लड़ पाए।
इस पूरे मामले में राष्ट्र रक्षक न्यूज़ चैनल ने जिस तरह से खबरों का प्रकाशन किया वह किसी की भावनाओं को आहत करने का प्रयास नहीं था, बल्कि एक पीड़ित द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष दायर किए गए परिवाद में लगाए गए आरोपो को लेकर था। यदि मीडिया ही किसी पीड़ित की आवाज को उठाने का काम नहीं करेगी तो भला चतुर्थ स्तंभ के रूप में स्थान रखने वाली मीडिया की जरूरत ही क्या है। राष्ट्र रक्षक द्वारा अनिल के परिवाद को लेकर प्रकाशित की गई खबरों से यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो राष्ट्र रक्षक न्यूज़ चैनल उसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं। लेकिन किसी की भावनाओं को अहत करने का उद्देश्य राष्ट्र रक्षक न्यूज़ चैनल का बिल्कुल भी नहीं था। राष्ट्र रक्षक न्यूज़ चैनल हर उस पीड़ित के साथ हमेशा खड़ा रहने का प्रयत्न करता है जिसे न्याय की आस हो।








