सुदामा चरित्र की कथा सुनकर भाव विभोर हुए श्रद्धालु, उपनगरीय क्षेत्र मंगलनगर में चल रही श्रीमद भागवत कथा का समापन कल

सुदामा चरित्र की कथा सुनकर भाव विभोर हुए श्रद्धालु, उपनगरीय क्षेत्र मंगलनगर में चल रही श्रीमद भागवत कथा का समापन कल

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कटनी। उपनगरीय क्षेत्र मंगलनगर में विगत 19 मार्च से चल रही श्रीमद भागवत कथा के अंतिम दिन आज 25 मार्च मंगलवार को सुदामा चरित्र का प्रसंग हुआ। कथा में कृष्ण-सुदामा चरित्र का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। कथा वाचक स्लीमनाबाद के ग्राम भेड़ा से पधारे पंडित रमाकांत पौराणिक महराज ने सुदामा चरित्र व सुखदेव विदाई का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मित्रता में गरीबी और अमीरी नहीं देखनी चाहिए। मित्र एक दूसरे का पूरक होता है। भगवान कृष्ण ने अपने बचपन के मित्र सुदामा की गरीबी को देखकर रोते हुए अपने राज सिंहासन पर बैठाया और उन्हें उलाहना दिया कि जब गरीबी में रह रहे थे तो अपने मित्र के पास तो आ सकते थे लेकिन सुदामा ने मित्रता को सर्वोपरि मानते हुए श्रीकृष्ण से कुछ नहीं मांगा। उन्होंने बताया कि सुदामा चरित्र हमें जीवन में आई कठिनाइयों का सामना करने की सीख देता है। सुदामा ने भगवान के पास होते हुए अपने लिए कुछ नहीं मांगा। अर्थात निस्वार्थ समर्पण ही असली मित्रता है। कथा के दौरान परीक्षित मोक्ष व भगवान सुखदेव की विदाई का वर्णन किया गया। कथा के बीच-बीच में भजनों पर श्रद्धालुओं ने नृत्य भी किया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिला पुरुष श्रोता मौजूद थे। कथा वाचक पंडित रमाकांत पौराणिक महराज ने बताया कि भागवत कथा का श्रवण से मन आत्मा को परम सुख की प्राप्ति होती है। भागवत में बताए उपदेशों उच्च आदर्शों को जीवन में ढालने से मानव जीवन जीने का उद्देश्य सफल हो जाता है। सुदामा चरित्र के प्रसंग में कहा कि अपने मित्र का विपरीत परिस्थितियों में साथ निभाना ही मित्रता का सच्चा धर्म है! मित्र वह है जो अपने मित्र को सही दिशा प्रदान करे जो कि मित्र की गलती पर उसे रोके और सही राह पर उसका सहयोग दे। आपको बता दे कि मंगलनगर के महेश प्रसाद  पयासी व उनकी धर्मपत्नी श्रीमती गंगा बाई पयासी के द्धारा क्षेत्र में 19 मार्च से 25 मार्च तक श्रीमद भागवत कथा का आयोजन भी किया गया है। इस धार्मिक आयोजन का समापन कल 26 मार्च बुधवार को हवन, पूजन व भंडारे के साथ होगा।

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Author: RashtraRakshak

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