कटनी में ‘केला में खेला’!, मंडी में कमीशन विवाद से मचा बवाल, सिंडिकेट राज के आरोप आये सामने, व्यापारी संघ का फरमान, केले पर लगेगा अब संघ का टैक्स

कटनी। कृषि उपज मंडी प्रांगण पहरुआ में केला खरीदी पर प्रति कैरेट 10 रुपये कमीशन वसूलने संबंधी प्रस्ताव को लेकर व्यापारियों के बीच विवाद गहरा गया है। कटनी फल-सब्जी व्यापारी कल्याण एसोसिएशन के कथित फैसले के बाद छोटे एवं फुटकर व्यापारियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। विरोध करने वालों का कहना है कि किसी भी निजी एसोसिएशन को इस प्रकार अनिवार्य शुल्क या कमीशन निर्धारित करने का अधिकार नहीं है। बिना किसी वैध अनुमति के व्यापारियों के एक संगठन ने इस तरह का तुगलकी फरमान जारी किया है।
व्यापारियों का आरोप है कि इस निर्णय से छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति बनेगी। उनका कहना है कि मंडी शुल्क अथवा व्यापारिक नियमों का निर्धारण संबंधित शासकीय प्राधिकरणों एवं मंडी प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है।
सिंडिकेट व्यवस्था के आरोप
विरोध कर रहे व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि कमीशन व्यवस्था लागू करने के पीछे बाजार में एकाधिकार स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। उनका दावा है कि इससे बड़े व्यापारियों का प्रभाव बढ़ेगा और छोटे व्यापारियों की स्वतंत्र खरीद-बिक्री प्रभावित हो सकती है। कुछ व्यापारिक जानकारों का मानना है कि यदि ऐसी व्यवस्था लागू होती है तो बाजार में प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ सकती है, जिससे फुटकर व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ने की आशंका है।
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
मामले को लेकर अब जिला प्रशासन, मंडी सचिव एवं कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग उठने लगी है। विरोध कर रहे व्यापारियों का कहना है कि विवादित प्रस्ताव की वैधानिकता की जांच कराई जाए तथा सभी पक्षों को सुनकर निष्पक्ष निर्णय लिया जाए। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो मंडी में व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। वहीं, इस पूरे मामले में एसोसिएशन का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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Author: RashtraRakshak

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