????ये कैसा विरोध????
तपती धूप में जल रहे मासूम बच्चे, वृद्ध और बीमार, शहर हित का राग अलापने वालों ने पैदा कर दी शहर में समस्या, पूरा शहर अस्त व्यस्त, बिना अनुमति के कर दिया गया चक्का जाम

कटनी। नवरात्र पर्व के पूर्व जुलूस मार्ग एवं जगन्नाथ चौक से लेकर घंटाघर तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर किए जा रहे प्रदर्शन ने आज पूरे शहर को अस्त व्यस्त कर दिया है। हालात इतने बत्तर हो गए हैं कि जहां-तहां स्कूली बच्चे बीमार लोग एवं महिलाएं फंसी हुई हैं। बगैर किसी पूर्व सूचना के ही प्रदर्शन कारियों ने अघोषित चक्का जाम कर दिया। जिसके कारण प्रदर्शन का स्वरूप बिगड़ गया और सारा शहर परेशानियों से घिर गया। प्रदर्शन के कारण शहर में उत्पन्न हुई अव्यवस्था और जाम में स्कूली बच्चों के वाहन, एंबुलेंस तथा अन्य ऐसे लोग फंसे हुए हैं जिनकी सेहत इतनी परेशानी झेलने के लायक नहीं। जाम में फंसे ऐसे लोगों की पीड़ा शायद प्रदर्शन कर रहे लोगों को दिखाई नहीं पड़ रही।
शहर हित के लिए या व्यवस्था बिगाड़ने के लिए हो रहा प्रदर्शन
शहर हित का दावा करते हुए किए जा रहे प्रदर्शन को लेकर अब जाम में फंसे लोग नाराजगी व्यक्त करते हुए यह कहते दिखाई दे रहे हैं कि यह प्रदर्शन शहर हित के लिए है या फिर शहर के लोगों को परेशानी में डालकर अव्यवस्था पैदा करने के लिए है। शहर हित की बात करने वाले लोगों को क्या शहर में रहने वाले लोगों की पीड़ा ही समझ में नहीं आ रही जो घंटों से जाम में फंसे लोगों की परेशानी समझ नहीं पा रहे।
बदले विरोध का तरीका
राष्ट्र रक्षक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए शैलेंद्र जैन, भव्या पांडे, अतुल गुप्ता, अवनीश दुबे, कलावती बाई, प्रत्यक्षा सिंह सहित अन्य लोगों ने कहा कि इस तरह का विरोध प्रदर्शन शहर हित के लिए हो ही नहीं सकता। अगर शहर हित की बात करते हैं तो ठीक तरह से प्रदर्शन भी करना चाहिए। प्रदर्शन को इस तरह करना चाहिए जिससे शहर में अव्यवस्था उत्पन्न ना हो और बात ऊपर तक पहुंच सके। लेकिन ऐसे शहर में जाम लगाकर अव्यवस्था उत्पन्न करना बिल्कुल उचित नहीं।
????ये कैसा विरोध????
तपती धूप में जल रहे मासूम बच्चे, वृद्ध और बीमार, शहर हित का राग अलापने वालों ने पैदा कर दी शहर में समस्या, पूरा शहर अस्त व्यस्त, बिना अनुमति के कर दिया गया चक्का जाम
कटनी। नवरात्र पर्व के पूर्व जुलूस मार्ग एवं जगन्नाथ चौक से लेकर घंटाघर तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर किए जा रहे प्रदर्शन ने आज पूरे शहर को अस्त व्यस्त कर दिया है। हालात इतने बत्तर हो गए हैं कि जहां-तहां स्कूली बच्चे बीमार लोग एवं महिलाएं फंसी हुई हैं। बगैर किसी पूर्व सूचना के ही प्रदर्शन कारियों ने अघोषित चक्का जाम कर दिया। जिसके कारण प्रदर्शन का स्वरूप बिगड़ गया और सारा शहर परेशानियों से घिर गया। प्रदर्शन के कारण शहर में उत्पन्न हुई अव्यवस्था और जाम में स्कूली बच्चों के वाहन, एंबुलेंस तथा अन्य ऐसे लोग फंसे हुए हैं जिनकी सेहत इतनी परेशानी झेलने के लायक नहीं। जाम में फंसे ऐसे लोगों की पीड़ा शायद प्रदर्शन कर रहे लोगों को दिखाई नहीं पड़ रही।
शहर हित के लिए या व्यवस्था बिगाड़ने के लिए हो रहा प्रदर्शन
शहर हित का दावा करते हुए किए जा रहे प्रदर्शन को लेकर अब जाम में फंसे लोग नाराजगी व्यक्त करते हुए यह कहते दिखाई दे रहे हैं कि यह प्रदर्शन शहर हित के लिए है या फिर शहर के लोगों को परेशानी में डालकर अव्यवस्था पैदा करने के लिए है। शहर हित की बात करने वाले लोगों को क्या शहर में रहने वाले लोगों की पीड़ा ही समझ में नहीं आ रही जो घंटों से जाम में फंसे लोगों की परेशानी समझ नहीं पा रहे।
बदले विरोध का तरीका
राष्ट्र रक्षक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए शैलेंद्र जैन, भव्या पांडे, अतुल गुप्ता, अवनीश दुबे, कलावती बाई, प्रत्यक्षा सिंह सहित अन्य लोगों ने कहा कि इस तरह का विरोध प्रदर्शन शहर हित के लिए हो ही नहीं सकता। अगर शहर हित की बात करते हैं तो ठीक तरह से प्रदर्शन भी करना चाहिए। प्रदर्शन को इस तरह करना चाहिए जिससे शहर में अव्यवस्था उत्पन्न ना हो और बात ऊपर तक पहुंच सके। लेकिन ऐसे शहर में जाम लगाकर अव्यवस्था उत्पन्न करना बिल्कुल उचित नहीं।








