खाकी पर खास मेहरबानी का आरोप, बरही पुलिस ने असली गुनहगारों को छोड़ निर्दोष आदिवासी को बनाया मोहरा,​राजनीतिक दबाव और भ्रष्टाचार के फेर में फंसी न्याय व्यवस्था, कैमोर कांड के बाद फिर विवादों में बरही थाना प्रभारी अरविंद चौबे की कार्यप्रणाली

​कटनी। कटनी जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति लगातार सवालों के घेरे में है। सामूहिक दुष्कर्म, हत्या और एटीएम चोरी जैसी वारदातों ने पहले ही पुलिस की साख पर बट्टा लगाया है, लेकिन अब बरही थाने से सामने आया नया मामला पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। आरोप है कि पुलिस ने राजनीतिक रसूखदारों के इशारे पर मुख्य आरोपियों को क्लीन चिट दे दी और उन लोगों को सलाखों के पीछे धकेल दिया जिनका अपराध से दूर-दूर तक नाता नहीं।

​घटना 26 और 27 जनवरी की दरमियानी रात की है, जब बरही थाना क्षेत्र के लुरमी ग्राम की शासकीय उचित मूल्य दुकान का ताला तोड़कर गेहूं और चावल की बोरियां चोरी की गईं। हैरानी की बात यह है कि घटना के 5 दिन बाद पुलिस ने औपचारिक प्राथमिकी FIR दर्ज की। जबकि सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने 28 जनवरी को ही बड़वारा के मझगवां और उमरिया जिले के कुछ संदिग्धों को हिरासत में ले लिया था।

​सूत्रों और पीड़ित पक्ष के दावों के अनुसार, पुलिस ने इस चोरी की आड़ में लाखों का खेल खेला है। आरोप है कि ​मुख्य आरोपी रिंकू शर्मा और अमित कुशवाहा को पुलिस ने कथित तौर पर सौदेबाजी कर रिहा कर दिया। ​उमरिया से लाए गए नामी गल्ला व्यपारी एक अग्रवाल को भी पूछताछ के नाम पर छोड़ दिया गया। ​ताहिर नामक युवक के परिजनों से कार्यवाही न करने का झांसा देकर पचास हजार ले लिए। जिसमें 32 हजार ताहिर के हिस्से का और 18 हजार अपचारी बालक के परिजनो ले लिया और अंत में आरोपी बना दिया गया।

​निर्दोष राघवेंद्र को फंसाने की

पिकअप वाली साजिश

​सबसे चौंकाने वाला मामला राघवेंद्र सिंह का है। राघवेंद्र के परिजनो का दावा है कि उसे राजनीतिक बुराई के चलते जबरदस्ती फसाया जा रहा है। जबकि वो घटना के समय काम के सिलसिले में इंदौर में था, जिसके रेलवे टिकट के प्रमाण भी मौजूद हैं।

​परिजनों ने आरोप लगाया कि 31 जनवरी की रात करीब 11 बजे, एक विशेष राजनीतिक पार्टी के नेता के साथ 60 से अधिक लोग पिकअप वाहन में अनाज की बोरियां लेकर आए और पुलिस के इशारे पर राघवेंद्र के घर के सामने रख दीं। इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है। आरोप है कि पुलिस इस अनाज को राघवेंद्र के घर से बरामद दिखाकर उसे मुख्य आरोपी बनाना चाहती थी।

राघवेंद्र की भाभी ​सरोज सिंह ने बताया कि भीड़ ने हमारे घर को जलाने की धमकी दी, गाली-गलौज की। हमने 112 को फोन किया, लेकिन पुलिस ने उपद्रवियों पर कार्यवाही करने के बजाय मूकदर्शक बनी रही। आज हम अपना घर छोड़कर जाने को मजबूर हैं।

​सवालों के घेरे में थाना प्रभारी

​कैमोर कांड में लापरवाही के चलते लाइन हाजिर हुए अरविंद चौबे को जब बरही की कमान सौंपी गई थी, तब उम्मीद थी कि व्यवस्था सुधरेगी। लेकिन ताजा घटनाक्रम ने पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा की भ्रष्टाचार मुक्त पुलिसिंग के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। आरोप लग रहे हैं कि सफेदपोश नेताओं के संरक्षण में बरही पुलिस नियम-विरुद्ध तरीके से लोगों को 5-5 दिन लॉकअप में रखकर मनमाने मेमोरेंडम साइन करवा रही है।

​बड़वारा पुलिस की उदासीनता और आरोपियों के बढ़ते दबाव के कारण पीड़ित आदिवासी परिवार अब पलायन की कगार पर है। सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और आईजी स्तर के अधिकारी इस फिक्स्ड जांच की उच्चस्तरीय जांच कराएंगे।

RashtraRakshak
Author: RashtraRakshak

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *