डा. पूरनचंद श्रीवास्तव की 106वीं जयंती पर कवि-स्मरण, रचनाओं का हुआ वाचन
कटनी। बुंदेली भाषा के प्रख्यात विद्वान, शिक्षाविद एवं साहित्यकार डा. पूरनचंद श्रीवास्तव की 106वीं जयंती स्थानीय शिकागो पब्लिक स्कूल के अमर शहीद हेमू कालानी स्मृति वाचनालय में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में उनके व्यक्तित्व एवं साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए उन्हें बुंदेली और हिंदी साहित्य का महत्वपूर्ण हस्ताक्षर बताया गया।
कार्यक्रम में वल्चर संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रव्यापी कार्य कर रहे दिलशेर खान (भोपाल) मुख्य अतिथि एवं जन अभियान परिषद के समन्वयक बालमुकुंद मिश्रा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अतिथियों एवं उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने डा. श्रीवास्तव के छायाचित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने कहा कि कटनी जिले के पिपरहटा जैसे छोटे से गांव में जन्मे डा. पूरनचंद श्रीवास्तव ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कटनी में प्राप्त की और बाद में संस्कारधानी जबलपुर के हितकारिणी महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर, रीडर, प्रोफेसर एवं प्राचार्य के रूप में उल्लेखनीय सेवाएं दीं। उन्होंने अपने शोधपरक लेखन और साहित्य सृजन से बुंदेली एवं हिंदी साहित्य को नई दिशा दी तथा अनेक शैक्षणिक कृतियों की रचना कर समाज में ज्ञान का प्रकाश फैलाया।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि जबलपुर की विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से प्रतिवर्ष 1 सितंबर को ‘बुंदेली दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जो डा. श्रीवास्तव की साहित्य साधना को समर्पित है। इसे कटनी जिले के लिए गौरव का विषय बताया गया। इस अवसर पर डा. श्रीवास्तव के चर्चित कविता संग्रह ‘भौंरहा पीपर’ से चयनित रचनाओं का भावपूर्ण वाचन किया गया। कार्यक्रम में श्रीमती भारती नागवानी, मुस्कान मूजर, रानी खरे, मोहन नागवानी, राजेंद्र सिंह ठाकुर, नानक देवानी (एडवोकेट), पी.डी. बैरागी सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।यदि चाहें तो इसे दैनिक भास्कर, पत्रिका या नई दुनिया की समाचार शैली में भी तैयार किया जा सकता है।