दवा की दुकान को बनाया जा रहा प्रयोगशाला, ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) के निर्णय पर एमपीपीए का कड़ा विरोध, सौंपा ज्ञापन

कटनी। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) द्वारा फार्मासिस्ट के अधिकारों को कम करते हुए जो आदेश जारी किया गया है उसको लेकर मध्यप्रदेश फार्मासिस्ट एसोसिएशन MPPA द्वारा विरोध दर्ज करते हुए एक ज्ञापन दिया गया।
एम पी फार्मासिस्ट एसोसिएशन MPPA के जिलाध्यक्ष कपिल देव गुप्ता ने बताया कि हाल ही में ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की 93 वीं बैठक में ड्रग्स एक्ट 1945 के नियम 64 में बदलाव का प्रस्ताव बनाया गया है। इसके अनुसार अब दवा दुकान पर पंजीकृत फार्मासिस्ट ही नहीं, बल्कि साइंस ग्रेजुएट भी (सक्षम व्यक्ति) दवाएं बेच सकता है। उक्त गलत निर्णय को लेकर आज एक ज्ञापन केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के नाम एमपी फार्मासिस्ट एसोसिएशन MPPA द्वारा संयुक्त कलेक्टर प्रदीप मिश्रा को दिया गया। ज्ञापन में बताया गया कि उक्त गलत निर्णय को लेकर एमपी फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड के हालिया फैसले का कड़ा विरोध जताया है। दरअसल, ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की 93वीं बैठक में ड्रग्स एक्ट 1945 के नियम 64 में बदलाव का प्रस्ताव बनाया गया है। इसके अनुसार अब दवा दुकान पर पंजीकृत फार्मासिस्ट ही नहीं, बल्कि साइंस ग्रेजुएट भी (सक्षम व्यक्ति) दवाएं बेच सकता है। उसके पास बस दो साल का अनुभव और 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स होना अनिवार्य होगा। एसोसिएशन का कहना है कि यह मरीजों के साथ खिलवाड़ साबित हो सकता है। कपिल देव गुप्ता ने बताया कि फार्मासिस्ट लाइफ सेविंग ड्रग बेचते हैं। इनके साइड इफेक्ट, डोजिंग और इंटरैक्शन बेहद जटिल होते हैं। बिना पूरी फार्मेसी ट्रेनिंग के दवा वितरण की अनुमति पब्लिक हेल्थ रिस्क है।
एमपी में आज 60 हजार से ज्यादा रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट हैं। सरकारी भर्तियां सीमित हैं, इसलिए ये खुदरा दवा दुकानों पर ही रोजगार के लिए निर्भर हैं। देशभर में 35 लाख से ज्यादा पंजीकृत फार्मासिस्ट हैं, जिनमें से 73% बेरोजगार या पार्ट टाइम रोजगार में हैं। हर साल करीब 2 लाख नए छात्र फार्मेसी की पढ़ाई पूरी कर इस क्षेत्र में आते हैं। ऐसे में फार्मासिस्ट के रोजगार को छीनकर अन्य को देना न्यायोचित नहीं है।साथ ही आमजन के स्वास्थ के साथ कही न कही खिलवाड़ होना ही हे। अतः संगठन का केंद्र सरकार से निवेदन है कि डीटीएबी की इस सिफारिश को तुरंत अस्वीकार करे तथा फार्मेसी पेशे को होने वाले आघात से बचाए। ज्ञापन देते समय संगठन के जिला उपाध्यक्ष वीरेंद्र तिवारी, जिला सहसचिव आनंद साहू एवं आकाश सोनी, कार्यालय प्रभारी सीताराम तिवारी एवं सदस्य साहिल, राहुल सिंह की मौजूदगी रही।

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Author: RashtraRakshak

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