बेजुबान पर बर्बरता मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में, 71 दिन बाद दर्ज हुई पशु क्रूरता और मारपीट की एफआईआर, आखिर क्यों हुई इतनी देर
कटनी। माधवनगर थाना क्षेत्र में एक बेजुबान कुत्ते के साथ हुई क्रूरता और उसका विरोध करने पर युवक से मारपीट के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना के करीब ढाई महीने बीत जाने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार 19 जुलाई को घटी इस वारदात की प्राथमिकी 28 सितंबर को पंजीकृत की गई, जिसके बाद यह सवाल उठना लाजिमी है कि बेजुबान पर अत्याचार और पीड़ित नागरिक की शिकायत पर कार्रवाई करने में पुलिस को इतना लंबा वक्त क्यों लग गया?
यह थी 19 जुलाई की वारदात?
यह घटना 19 जुलाई 2026 की शाम करीब 5:00 बजे माधवनगर के कृष्णानी भवन के पास की है। अस्पताल लाइन निवासी शिवा चेतवानी (उम्र 29 वर्ष) ने देखा कि आरोपी नवीन कृष्णानी और उसके दो अन्य साथी एक कुत्ते के चारों पैरों और मुंह को रस्सी से कसकर बांधे हुए थे, जिससे वह तड़प रहा था। जब शिवा ने बेजुबान के साथ हो रही इस क्रूरता को रोकने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उनके साथ गाली-गलौज करते हुए हाथ-मुक्के से मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।
71 दिन बाद दर्ज हुआ मामला, सवालिया निशान के घेरे में खाकी
कानूनन किसी संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर पुलिस को तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई करनी होती है। लेकिन इस मामले में।वारदात के दो महीने से अधिक समय बाद 28 सितंबर को पुलिस ने अपराध क्रमांक 1045/26 के तहत धारा 11 पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और BNS की धाराओं (296(बी), 115(2), 3(5)) में मामला दर्ज किया। अब सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर पुलिस इस मामले में फिर दर्ज करनी में इतनी लेट क्यों हो गई।