कटनी उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला, ट्रेन रद्द होने की समय पर सूचना नहीं देना रेलवे को पड़ा महंगा, यात्रियों को मिलेगा मुआवजा, रेलवे की सेवा में कमी उजागर
कटनी। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, कटनी ने रेलवे से जुड़े दो मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि ट्रेन निरस्तीकरण की समय पर सूचना नहीं देना रेलवे की सेवा में कमी (Deficiency in Service) है। आयोग ने दोनों मामलों में प्रभावित यात्रियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रेलवे को मुआवजा, टैक्सी यात्रा का खर्च तथा वाद-व्यय देने के निर्देश दिए हैं।
पहले मामले सी.सी. क्रमांक 60/2021 (सतवीर सिंह भाटिया बनाम भारत सरकार एवं अन्य) में परिवादी ने 6 मार्च 2021 को नई दिल्ली से अमृतसर जाने के लिए शताब्दी एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 02029) में आरक्षण कराया था। ट्रेन सुबह 7:20 बजे रवाना होनी थी, लेकिन रेलवे ने ट्रेन निरस्त होने की सूचना 5 मार्च को शाम 5:35 बजे दी, जो निर्धारित प्रस्थान समय से 12 घंटे से भी कम पहले थी।
आयोग ने पाया कि रेलवे यह साबित नहीं कर सका कि ट्रेन निरस्त करने का निर्णय कब लिया गया था। साथ ही, ट्रेन निरस्तीकरण से जुड़े आवश्यक दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किए गए। समय पर सूचना नहीं मिलने के कारण परिवादी को दिल्ली से अमृतसर तक टैक्सी से यात्रा करनी पड़ी। आयोग ने रेलवे को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए परिवादी को 5,000 मानसिक एवं शारीरिक कष्ट, 6,500 टैक्सी खर्च, कुल 11,500 तथा 2,000 वाद-व्यय देने का आदेश दिया। निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा। इसी तरह सी.सी. क्रमांक 61/2021 (मनदीप कौर भाटिया बनाम भारत सरकार एवं अन्य) में भी आयोग ने पाया कि रेलवे यह प्रमाणित नहीं कर सका कि ट्रेन कब निरस्त की गई और इसकी सूचना यात्री को कब दी गई। इसे भी सेवा में कमी माना गया।
इस मामले में आयोग ने परिवादिनी को 5,000 मानसिक एवं शारीरिक कष्ट, 7,200 अमृतसर से हजरत निजामुद्दीन तक टैक्सी खर्च, 2,200 जालंधर से अमृतसर टैक्सी खर्च, कुल 14,400 तथा 2,000 वाद-व्यय देने का आदेश दिया। भुगतान में विलंब होने पर इस राशि पर भी 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा। दोनों मामलों में परिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता राहुल गुप्ता ने पैरवी की। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, कटनी ने 13 अगस्त 2026 को पारित अपने आदेश में स्पष्ट किया कि ट्रेन निरस्तीकरण की सूचना यात्रियों को समय रहते देना रेलवे की जिम्मेदारी है और ट्रेन रद्द करने के निर्णय से संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करना भी रेलवे प्रशासन का दायित्व है। यह फैसला यात्रियों के उपभोक्ता अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।