चेक बाउंस मामले में आरोपी को छह माह की सजा, 11.08 लाख रुपये क्षतिपूर्ति के आदेश
कटनी। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कटनी अजय कुमार नागेश की अदालत ने चेक अनादरण के मामले में आरोपी ऋषि सिकदर को दोषी ठहराते हुए छह माह के सादा कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी को परिवादी को 11 लाख 8 हजार 250 रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में अदा करने का भी आदेश दिया है। क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं करने पर आरोपी को एक माह का अतिरिक्त सादा कारावास भुगतना होगा। यह मामला SCNIA No. 507/2019, विक्रम सिंह यादव विरुद्ध ऋषि सिकदर से संबंधित है। परिवादी विक्रम सिंह यादव के अनुसार, पौधों की सप्लाई के लिए आरोपी को सितंबर 2018 में कुल 6.50 लाख रुपये अग्रिम दिए गए थे। पौधों की आपूर्ति नहीं होने पर राशि वापस मांगने पर आरोपी ने 5 नवंबर 2018 को 6.50 लाख रुपये का चेक जारी किया।
परिवादी ने चेक को 5 दिसंबर 2018 को बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत किया, लेकिन खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक अनादरित हो गया। इसके बाद 24 दिसंबर 2018 को आरोपी को कानूनी मांग सूचना भेजी गई, जो 26 दिसंबर को प्राप्त होना अदालत ने माना। निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं किए जाने पर परिवादी ने न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया।
आरोपी ने लगाया था चेक के दुरुपयोग का आरोप
विचारण के दौरान आरोपी ऋषि सिकदर ने चेक जारी करने से इनकार करते हुए बचाव लिया था। उसका कहना था कि चेक उसने चेतन सचदेवा के साथ साझेदारी में आर्टिनेंस फैक्ट्री कटनी के टेंडर के लिए सुरक्षा के रूप में दिया था और बाद में उसका कथित रूप से दुरुपयोग किया गया।
अदालत ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 118 और 139 के तहत चेक धारक के पक्ष में मौजूद वैधानिक उपधारणाओं तथा दोनों पक्षों के साक्ष्यों पर विचार किया। अदालत ने माना कि आरोपी अपने बचाव के माध्यम से इन उपधारणाओं को खंडित करने में सफल नहीं हुआ। साथ ही चेक के अनादरण, कानूनी नोटिस और निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किए जाने के तथ्य भी प्रमाणित पाए गए।
9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के आधार पर क्षतिपूर्ति
अदालत ने चेक की मूल राशि 6,50,000 रुपये पर 5 नवंबर 2018 से निर्णय की तारीख 28 सितंबर 2026 तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की गणना की। अदालत के अनुसार ब्याज की राशि 4,58,250 रुपये बनी। इस प्रकार मूल राशि और ब्याज मिलाकर कुल 11,08,250 रुपये की क्षतिपूर्ति निर्धारित की गई। अदालत ने आरोपी को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत दोषसिद्ध करते हुए छह माह के सादा कारावास से दंडित किया और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357(3) के तहत क्षतिपूर्ति राशि परिवादी को देने का आदेश दिया।