प्यार के आगे फीकी पड़ी मजहब और सलाखों की दीवार: सतना की महिला जेल अधिकारी ने पूर्व कैदी संग रचाई शादी

सतना। कहते हैं कि मोहब्बत न सरहद देखती है और न ही मजहब। कुछ ऐसा ही अनूठा मामला मध्य प्रदेश के सतना जिले से सामने आया है, जहां केंद्रीय जेल में पदस्थ एक महिला सहायक जेल अधीक्षक ने सजा काट चुके एक पूर्व कैदी के साथ सात फेरे लेकर नई जिंदगी की शुरुआत की है। हिंदू रीति-रिवाज से हुई यह शादी पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
ड्यूटी के दौरान शुरू हुई थी प्रेम कहानी
पूरा मामला सतना केंद्रीय जेल से जुड़ा है। यहां सहायक जेल अधीक्षक के पद पर पदस्थ फिरोजा खातून (निवासी रीवा) की मुलाकात ड्यूटी के दौरान धर्मेंद्र सिंह (निवासी चंदला) से हुई थी। उस समय फिरोजा जेल में वारंट इंचार्ज थीं और धर्मेंद्र वारंट का ही काम संभालता था। साथ काम करते-करते दोनों के बीच दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। दोनों ने सामाजिक बंधनों और धार्मिक दीवारों को किनारे रख एक साथ जीवन बिताने का फैसला किया। छतरपुर के लवकुश नगर में मंगलवार को यह विवाह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ।
हत्या के मामले में उम्रकैद काट चुका है युवक
धर्मेंद्र सिंह वर्ष 2007 में चंदला नगर परिषद के उपाध्यक्ष कृष्णदत्त दीक्षित की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था। उसने करीब 14 साल जेल में बिताए। जेल के भीतर उसके अच्छे आचरण को देखते हुए जेल प्रबंधन ने उसे रिहा कर दिया था। बीते 4 वर्षों से धर्मेंद्र जेल से बाहर था, जिसके बाद अब दोनों ने परिणय सूत्र में बंधने का निर्णय लिया।
जेल परिसर में रही चर्चा
इस शादी की खबर मिलते ही जेल महकमे में यह कौतूहल का विषय बन गया। जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस जोड़े को शुभकामनाएं दी हैं। अधिकारियों का मानना है कि जेल की चहारदीवारी के भीतर कानून-व्यवस्था संभालने वाली अधिकारी ने यह संदेश दिया है कि इंसानियत और प्रेम का कोई अलग मजहब नहीं होता।

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Author: RashtraRakshak

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