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कचरे की जगह मलबे की ढुलाई, वरिष्ठ पार्षद ने सड़क पर पकड़ा वाहन, अफसरों ने मौके पर की पंचनामा कार्रवाई, कचरे के नाम पर मलबा और 2700 रुपए प्रति टन की वसूली के आरोप

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कटनी। शहर में कचरे के नाम पर नगरनिगम की ठेका कंपनी बड़ा खेल कर रही है। गुरुवार को कचरा परिवहन करने वाले ट्रक में कचरे की बजाय मलबा भरकर ले जाया जा रहा था। शहर के वरिष्ठ पार्षद ने ठेका कंपनी के ट्रक को देखा तो उसे रोक लिया और कंपनी के खेल को उजागर कर दिया। सूचना पाकर पहुंचे नगरनिगम के अधिकारियों ने मौके पर पंचनामा कार्रवाई की है। जानकारी के अनुसार नगरनिगम ने शहर में कचरा परिवहन, संग्रहण व प्रबंधन का ठेका एमएसडब्लू कंपनी को दिया है। कंपनी कचरा गाड़ियों के माध्यम से शहर से कचरा एकत्रित करती है और दुगाड़ी नाला के पास बने ट्रांसफर स्टेशन से कचरा ट्रकों में भरकर कंपनी के प्लांट में भेजा जाता है। वरिष्ठ पार्षद मिथलेश जैन ने बताया कि गुरुवार को विश्राम बाबा के समीप ठेका कंपनी का एमपी 21 जी 1898 मिला। ट्रक को हरे कपड़े से ढंका गया था, लेकिन उसमें कचरे की बजाय मलबा भरा हुआ नगर आ रहा था। कचरे के नाम पर मलबा की तौल करवाकर नगरनिगम को राजस्व हानि पहुंचाने की आशंका पर ट्रक को रोका गया और नगरनिगम के अधिकारियों को सूचित किया गया।

22 टन मिला मलबा, बनाया पंचनामा

पार्षद से सूचना पाकर एमएसडब्ल्यूए के नोडल ऑफिसर एवं नगर निगम के उपंयत्री आदेश जैन, योजना के इंडिपेंडेंस इंजीनियर युगल दुबे, एमएसडब्ल्यू के सीएंडटी हेड जावेद खान मौके पर पहुंचे। इंजीनियर आदेश जैन ने ट्रक का पंचनामा बनाया, जिसमें पाया गया कि ट्रक में पत्थर व मलबा भरा हुआ है उसे ढंकने के लिए ऊपर से झाड़ियां लगा दी गई है और हरे कपड़े से ढक दिया गया है। ट्रक का वजन कराए जाने पर ट्रक में लगभग 22 टन वजन पाया गया। हालांकि कंपनी कर्मचारियों ने अधिकारियों को बताया कि वे मलबा का उपयोग गड्ढा भरने के लिए करने वाले थे।

सिर्फ कचरा परिवहन की अनुमति

नगरनिगम के अधिकारियों ने बताया कि ठेका कंपनी को कचरा परिवहन में लगे वाहनों में सिर्फ कचरा लेकर जाने की ही अनुमति है। यदि कंपनी ट्रक का उपयोग किसी अन्य कार्य के लिए करती है तो उसे इसकी अनुमति लेना अनिवार्य है।

मलबा का भुगतान ले रही कंपनी

मिथलेश जैन ने आरोप लगाया है कि निगम अधिकारियों के संरक्षण में एमएसडब्लू द्वारा कचरा के बजाय मलबा ढोकर 2700 रुपए प्रति टन के हिसाब से वसूला जा रहा है। जबकि पूरे शहर में कचरो की ढेर लगे हुए हैं। जैन ने आयुक्त से मांग की है कि एमएसडब्ल्यू के प्रबंधन आदि के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराई जाए।

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कचरे की जगह मलबे की ढुलाई,
वरिष्ठ पार्षद ने सड़क पर पकड़ा वाहन, अफसरों ने मौके पर की पंचनामा कार्रवाई, कचरे के नाम पर मलबा और 2700 रुपए प्रति टन की वसूली के आरोप

कटनी। शहर में कचरे के नाम पर नगरनिगम की ठेका कंपनी बड़ा खेल कर रही है। गुरुवार को कचरा परिवहन करने वाले ट्रक में कचरे की बजाय मलबा भरकर ले जाया जा रहा था। शहर के वरिष्ठ पार्षद ने ठेका कंपनी के ट्रक को देखा तो उसे रोक लिया और कंपनी के खेल को उजागर कर दिया। सूचना पाकर पहुंचे नगरनिगम के अधिकारियों ने मौके पर पंचनामा कार्रवाई की है। जानकारी के अनुसार नगरनिगम ने शहर में कचरा परिवहन, संग्रहण व प्रबंधन का ठेका एमएसडब्लू कंपनी को दिया है। कंपनी कचरा गाड़ियों के माध्यम से शहर से कचरा एकत्रित करती है और दुगाड़ी नाला के पास बने ट्रांसफर स्टेशन से कचरा ट्रकों में भरकर कंपनी के प्लांट में भेजा जाता है। वरिष्ठ पार्षद मिथलेश जैन ने बताया कि गुरुवार को विश्राम बाबा के समीप ठेका कंपनी का एमपी 21 जी 1898 मिला। ट्रक को हरे कपड़े से ढंका गया था, लेकिन उसमें कचरे की बजाय मलबा भरा हुआ नगर आ रहा था। कचरे के नाम पर मलबा की तौल करवाकर नगरनिगम को राजस्व हानि पहुंचाने की आशंका पर ट्रक को रोका गया और नगरनिगम के अधिकारियों को सूचित किया गया।
22 टन मिला मलबा, बनाया पंचनामा
पार्षद से सूचना पाकर एमएसडब्ल्यूए के नोडल ऑफिसर एवं नगर निगम के उपंयत्री आदेश जैन, योजना के इंडिपेंडेंस इंजीनियर युगल दुबे, एमएसडब्ल्यू के सीएंडटी हेड जावेद खान मौके पर पहुंचे। इंजीनियर आदेश जैन ने ट्रक का पंचनामा बनाया, जिसमें पाया गया कि ट्रक में पत्थर व मलबा भरा हुआ है उसे ढंकने के लिए ऊपर से झाड़ियां लगा दी गई है और हरे कपड़े से ढक दिया गया है। ट्रक का वजन कराए जाने पर ट्रक में लगभग 22 टन वजन पाया गया। हालांकि कंपनी कर्मचारियों ने अधिकारियों को बताया कि वे मलबा का उपयोग गड्ढा भरने के लिए करने वाले थे।
सिर्फ कचरा परिवहन की अनुमति
नगरनिगम के अधिकारियों ने बताया कि ठेका कंपनी को कचरा परिवहन में लगे वाहनों में सिर्फ कचरा लेकर जाने की ही अनुमति है। यदि कंपनी ट्रक का उपयोग किसी अन्य कार्य के लिए करती है तो उसे इसकी अनुमति लेना अनिवार्य है।
मलबा का भुगतान ले रही कंपनी
मिथलेश जैन ने आरोप लगाया है कि निगम अधिकारियों के संरक्षण में एमएसडब्लू द्वारा कचरा के बजाय मलबा ढोकर 2700 रुपए प्रति टन के हिसाब से वसूला जा रहा है। जबकि पूरे शहर में कचरो की ढेर लगे हुए हैं। जैन ने आयुक्त से मांग की है कि एमएसडब्ल्यू के प्रबंधन आदि के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराई जाए।

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Author: RashtraRakshak