????खेल कमीशन का????
धरने के पीछे की सच्चाई, नहीं मिल रही मलाई?, सफाई से ज्यादा सफाई कर्मियों की संख्या बढ़ाने में सत्ता पक्ष का ध्यान, विपक्ष की भूमिका में सत्ता पक्ष, कमिश्नर की दो टूक सफाई से मतलब या सफाई कर्मियों से

कटनी। नगर निगम कटनी में गति दिवस जो कुछ दृश्य देखने को मिला वह बेहद हास्यास्पद था। विपक्ष को तो छोड़िए सत्ता पक्ष के ही कुछ पार्षद गत दिवस नगर निगम कमिश्नर नीलेश दुबे के कार्यालय के सामने नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। साफ सफाई व्यवस्था को सुधारने की मांग को एक किनारे कर धरने पर बैठे सत्ता पक्ष के पार्षद वार्ड में सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग करते नजर आए। विपक्ष की भूमिका में खुद सत्ता पक्ष के पार्षद दिखाई दे रहे थे। इस दृश्य ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या सफाई कर्मियों की संख्या दिखाकर गोलमाल करके मोटी मलाई कमाने की कहानी तो नहीं गढ़ी जा रही है। जिस तरह सत्ता पक्ष के पार्षद सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे थे उससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि जैसे उन्हें पर्याप्त मलाई नहीं मिल पा रही।
तो क्या करना चाहते हैं खेल
नगर निगम से जुड़े सूत्र बताते हैं कि कुछ पार्षदों के द्वारा अपने वार्डों में फर्जी तौर पर सफाई कर्मियों की संख्या अधिक दिखाकर उनको मिलने वाले मानदेय में कमीशन बाजी की जाती है। बीते दिनों इस तरह की चर्चाएं सामने भी आई थी। अब एक बार फिर सत्ता पक्ष के ही पार्षदों के द्वारा इस तरह का प्रदर्शन करके सफाई कर्मियों की वृद्धि की मांग किया जाना काफी हद तक इसके पीछे छिपे खेल को उजागर करता है।
विपक्ष सफाई से संतुष्ट
जिस तरह सत्ता पक्ष के पार्षदों के द्वारा गत दिवस सफाई कर्मियों की संख्या बढ़ाने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया गया यदि इस तरह का प्रदर्शन विपक्ष करता तो बात समझ में आती, लेकिन विपक्ष की भूमिका खुद सत्ता पक्ष के लोग ही निभा रहे हैं। जिससे कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। अब तो सवाल यह भी है कि क्या विपक्ष को सफाई कर्मियों की संख्या से ज्यादा बेहतर साफ सफाई से मतलब है। क्या विपक्ष साफ सफाई व्यवस्था में संख्या वृद्धि के पक्ष में नहीं। कारण चाहे जो भी हो लेकिन सत्ता पक्ष के कुछ पार्षदों के द्वारा इस तरह का प्रदर्शन किया जाना अपने आप में उनके प्रदर्शन पर प्रश्नवाचक चिन्ह लगाता है।
इनका कहना है
नगर निगम कमिश्नर नीलेश दुबे ने इस संबंध में बातचीत करते हुए कहा कि गत दिवस मेरे कार्यालय के बाहर कुछ भाजपा पार्षदों के द्वारा सफाई कर्मियों को बधाई जाने की मांग करते हुए धरना दिया गया। मैंने उस दौरान बातचीत करते हुए पार्षदों से यह सवाल किया था कि आप लोगों को वार्ड में बेहतर साफ सफाई से मतलब है या फिर सफाई कर्मियों की संख्या में बढ़ोतरी से। शहर की साफ सफाई व्यवस्था को लेकर मेरे द्वारा ग्राउंड प्लान तैयार किया जा रहा है। बेहतर साफ सफाई के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। कम संसाधनों में भी बेहतर कार्य किया जा सकता है जरूरत है तो सिर्फ इच्छा शक्ति की।
????खेल कमीशन का????
धरने के पीछे की सच्चाई, नहीं मिल रही मलाई?, सफाई से ज्यादा सफाई कर्मियों की संख्या बढ़ाने में सत्ता पक्ष का ध्यान, विपक्ष की भूमिका में सत्ता पक्ष, कमिश्नर की दो टूक सफाई से मतलब या सफाई कर्मियों से
कटनी। नगर निगम कटनी में गति दिवस जो कुछ दृश्य देखने को मिला वह बेहद हास्यास्पद था। विपक्ष को तो छोड़िए सत्ता पक्ष के ही कुछ पार्षद गत दिवस नगर निगम कमिश्नर नीलेश दुबे के कार्यालय के सामने नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। साफ सफाई व्यवस्था को सुधारने की मांग को एक किनारे कर धरने पर बैठे सत्ता पक्ष के पार्षद वार्ड में सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग करते नजर आए। विपक्ष की भूमिका में खुद सत्ता पक्ष के पार्षद दिखाई दे रहे थे। इस दृश्य ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या सफाई कर्मियों की संख्या दिखाकर गोलमाल करके मोटी मलाई कमाने की कहानी तो नहीं गढ़ी जा रही है। जिस तरह सत्ता पक्ष के पार्षद सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे थे उससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि जैसे उन्हें पर्याप्त मलाई नहीं मिल पा रही।
तो क्या करना चाहते हैं खेल
नगर निगम से जुड़े सूत्र बताते हैं कि कुछ पार्षदों के द्वारा अपने वार्डों में फर्जी तौर पर सफाई कर्मियों की संख्या अधिक दिखाकर उनको मिलने वाले मानदेय में कमीशन बाजी की जाती है। बीते दिनों इस तरह की चर्चाएं सामने भी आई थी। अब एक बार फिर सत्ता पक्ष के ही पार्षदों के द्वारा इस तरह का प्रदर्शन करके सफाई कर्मियों की वृद्धि की मांग किया जाना काफी हद तक इसके पीछे छिपे खेल को उजागर करता है।
विपक्ष सफाई से संतुष्ट
जिस तरह सत्ता पक्ष के पार्षदों के द्वारा गत दिवस सफाई कर्मियों की संख्या बढ़ाने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया गया यदि इस तरह का प्रदर्शन विपक्ष करता तो बात समझ में आती, लेकिन विपक्ष की भूमिका खुद सत्ता पक्ष के लोग ही निभा रहे हैं। जिससे कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। अब तो सवाल यह भी है कि क्या विपक्ष को सफाई कर्मियों की संख्या से ज्यादा बेहतर साफ सफाई से मतलब है। क्या विपक्ष साफ सफाई व्यवस्था में संख्या वृद्धि के पक्ष में नहीं। कारण चाहे जो भी हो लेकिन सत्ता पक्ष के कुछ पार्षदों के द्वारा इस तरह का प्रदर्शन किया जाना अपने आप में उनके प्रदर्शन पर प्रश्नवाचक चिन्ह लगाता है।
इनका कहना है
नगर निगम कमिश्नर नीलेश दुबे ने इस संबंध में बातचीत करते हुए कहा कि गत दिवस मेरे कार्यालय के बाहर कुछ भाजपा पार्षदों के द्वारा सफाई कर्मियों को बधाई जाने की मांग करते हुए धरना दिया गया। मैंने उस दौरान बातचीत करते हुए पार्षदों से यह सवाल किया था कि आप लोगों को वार्ड में बेहतर साफ सफाई से मतलब है या फिर सफाई कर्मियों की संख्या में बढ़ोतरी से। शहर की साफ सफाई व्यवस्था को लेकर मेरे द्वारा ग्राउंड प्लान तैयार किया जा रहा है। बेहतर साफ सफाई के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। कम संसाधनों में भी बेहतर कार्य किया जा सकता है जरूरत है तो सिर्फ इच्छा शक्ति की।